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[Hindi] क्या ए-आई प्रणालियों में वास्तव में चेतना है?

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[Preview books] [Borrow books] [Pause] ब्लेक लेमोइन नामक गूगल के एक पूर्व कर्मचारी के लिए यही प्रश्न उनकी नौकरी और प्रतिष्ठा खोने का कारण बना। संभवतः आपने इसके बारे में पढ़ा होगा।2022 में, जब वे गूगल की एआई प्रणालियों में से एक 'लैम्डा' का परीक्षण कर रहे थे, तब ब्लेक को लगा कि उस एआई में चेतना है! वे यहीं नहीं रुके। इसके बजाय, उन्होंने उस एआई के अधिकारों के लिए संघर्ष करना शुरू कर दिया। परिणामस्वरूप उन्हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ी।AI सिस्टम की चेतना के बारे में बात करने से पहले, आइए सबसे पहले अपने खुद के चेतन अनुभव को समझें। हम चेतन अनुभव कैसे प्राप्त करते हैं, यह प्रश्न लंबे समय से तंत्रिका-विज्ञानियों के लिए एक पहेली बना हुआ था। जब फंक्शनल एम-आर-आई स्कैनर जैसे आधुनिक उपकरणों का आविष्कार हुआ, तब तंत्रिका-विज्ञानी मानव-मस्तिष्क की विभिन्न ग्रहण प्रक्रियाओं को समझाने में सक्षम हुए। वे मस्तिष्क के उन सटीक क्षेत्रों की पहचान करसके जो किसी विशेष प्रकार की अनुभूति के लिए उत्तरदायी होते हैं।लेकिन प्रारंभ में यह स्पष्ट नहीं था कि मस्तिष्क के विभिन्न भागों में फैले हुए जटिल अनुभव किस प्रकार एकीकृत होकर साकार होते हैं।उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि आप एक वृक्ष को देखते हैं। आप तुरंत पहचान लेते हैं कि वह किसी विशेष प्रजाति का वृक्ष है। तंत्रिका-विज्ञानी मस्तिष्क के उन विशिष्ट क्षेत्रों को इंगित करसकते थे जो वृक्ष की पत्तियों, उसके फलों, उसके तने आदि की पहचान करते हैं।लेकिन आपका वास्तविक अनुभव मस्तिष्क के अनेक क्षेत्रों द्वारा संसाधित होता है। फिर भी मस्तिष्क में ऐसा कोई एक विशिष्ट क्षेत्र नहीं है जो वृक्ष की संपूर्ण छवि को एकत्रित करके आपको यह अनुभव कराए कि, 'अहा! यह आम का पेड़ है!'तंत्रिका-विज्ञानियों ने इस समस्या को 'बाइंडिंग प्रॉब्लम' कहा। अर्थात्, मस्तिष्क के विभिन्न भागों में बिखरी हुई सूचनाओं को एकीकृत करके उन्हें परस्पर जोड़ने की समस्या।1900 के दशक के उत्तरार्ध में, अमेरिकी तंत्रिका-विज्ञानी बर्नार्ड बार्स ने इस घटना की व्याख्या करने के लिए 'ग्लोबल वर्कस्पेस थ्योरी' नामक सिद्धांत प्रस्तुत किया। वह सिद्धांत काफी हद तक रूपकात्मक था।बार्स के रूपक की काफी आलोचना हुई। क्योंकि उससे ऐसा प्रतीत होता था मानो अनुभव करने ...
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