कृष्णवाणी: गीता के 18 योग cover art

कृष्णवाणी: गीता के 18 योग

कृष्णवाणी: गीता के 18 योग

By: Ramesh Kumar Chauhan
Listen for free

Summary

कृष्णवाणी: गीता के 18 योग

भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश, आधुनिक जीवन की भाषा में।


श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का अनंत मार्गदर्शन है। इस पॉडकास्ट में हम गीता के 18 योगों की गहराई को सरल और आधुनिक भाषा में प्रस्तुत करेंगे। हर एपिसोड में आप पाएँगे—

  • जीवन की चुनौतियों को संतुलित ढंग से कैसे सामना करें।
  • कर्म, भक्ति और ज्ञान योग का वास्तविक अर्थ।
  • ध्यान, आत्म-नियंत्रण और आत्म-साक्षात्कार के मार्ग।
  • गीता के श्लोकों को आज के कार्यस्थल, परिवार और समाज में कैसे लागू करें।

यह श्रवण यात्रा न केवल आध्यात्मिक चिंतन कराएगी, बल्कि आपके भीतर शांति, आत्मविश्वास और जीवन की स्पष्टता भी जगाएगी।

आइए, सुनें भगवान श्रीकृष्ण की अमर वाणी

और खोजें आधुनिक जीवन में मोक्ष और आनंद का मार्ग।

Copyright 2025 Ramesh Kumar Chauhan
Spirituality
Episodes
  • निष्काम कर्म से मोक्ष का मार्ग | ज्ञानविभागयोग के दिव्य श्लोक (1-15)
    May 13 2026

    कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक एपिसोड में श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञानविभागयोग के प्रारंभिक श्लोकों (1-15) की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की गई है। भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को आत्मज्ञान, कर्मयोग और ईश्वरीय अवतार के गूढ़ रहस्यों को समझाते हुए बताते हैं कि आत्मा शाश्वत, अविनाशी और जन्म-मृत्यु से परे है।

    इस एपिसोड में यह स्पष्ट किया गया है कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब भगवान स्वयं पृथ्वी पर अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। श्रीकृष्ण अपनी दिव्य सर्वज्ञता का वर्णन करते हुए अर्जुन को बताते हैं कि निष्काम भाव से किया गया कर्म ही मनुष्य को कर्मबंधन और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाता है।

    चर्चा में यह भी बताया गया है कि यह दिव्य ज्ञान कोई नया सिद्धांत नहीं, बल्कि एक प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा है, जिसे केवल अटूट श्रद्धा, भक्ति और विश्वास के माध्यम से ही आत्मसात किया जा सकता है। जब मनुष्य अपने सांसारिक कर्तव्यों को ईश्वर को समर्पित कर निष्काम भाव से निभाता है, तब उसका जीवन शुद्ध और संतुलित बनता है।

    यह एपिसोड विशेष रूप से उन श्रोताओं के लिए उपयोगी है जो:

    गीता के ज्ञानविभागयोग को समझना चाहते हैं

    निष्काम कर्म और मोक्ष के संबंध को जानना चाहते हैं

    भगवान के अवतार और धर्म स्थापना के सिद्धांत को समझना चाहते हैं

    आध्यात्मिक शांति और आत्मिक विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं

    कृष्णवाणी के साथ यह दिव्य यात्रा आपको सिखाएगी कि

    आत्मज्ञान, निष्काम कर्म और ईश्वर में समर्पण ही

    जीवन की वास्तविक मुक्ति का मार्ग है।

    Show More Show Less
    27 mins
  • कर्म योग सिद्धांत
    May 7 2026

    कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस एपिसोड में भगवद्गीता में वर्णित कर्म योग सिद्धांत की व्यापक और व्यावहारिक व्याख्या प्रस्तुत की गई है। भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि निष्काम कर्म ही आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और मोक्ष का वास्तविक आधार है।

    यह एपिसोड बताता है कि संसार में कर्म से बचना असंभव है, लेकिन फल की आसक्ति ही मनुष्य को कर्मबंधन में बाँधती है। जब व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन अनासक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण के साथ करता है, तब वही कर्म साधना बन जाता है।

    इस चर्चा में मन के निग्रह, निरंतर अभ्यास और मानसिक चंचलता पर नियंत्रण के महत्व को भी समझाया गया है। यह एपिसोड विशेष रूप से उन श्रोताओं के लिए उपयोगी है जो तनावपूर्ण जीवन में संतुलन, शांति और आध्यात्मिक मार्गदर्शन की खोज में हैं।

    Show More Show Less
    13 mins
  • कर्म करते हुए भी मुक्त कैसे रहें? | 'अकर्म' का गीता सिद्धांत | कृष्णवाणी
    Apr 30 2026

    कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस गहन आध्यात्मिक एपिसोड में श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान-विज्ञान योग के माध्यम से ज्ञान और कर्म के अद्भुत समन्वय को सरल और प्रभावशाली रूप में समझाया गया है। यह एपिसोड बताता है कि जब कर्म को आत्मज्ञान और अनासक्ति के साथ जोड़ा जाता है, तब वह केवल बाहरी क्रिया न रहकर मोक्ष का साधन बन जाता है।

    इस चर्चा में गीता के उस सूक्ष्म सिद्धांत ‘अकर्म’ को भी स्पष्ट किया गया है, जहाँ मनुष्य कर्म करते हुए भी स्वयं को कर्ता नहीं मानता। जब व्यक्ति अहंकार और फल की आसक्ति से मुक्त होकर कार्य करता है, तब वह कर्म बंधन से बचकर आंतरिक शांति और संतुलन प्राप्त करता है।

    एपिसोड में यह भी बताया गया है कि ज्ञानयोग और कर्मयोग परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। ज्ञान कर्म को दिशा देता है, और कर्म ज्ञान को व्यवहार में उतारता है। इस समन्वय के माध्यम से मनुष्य न केवल अपने जीवन के कर्तव्यों को निभाता है, बल्कि धीरे-धीरे आत्मसाक्षात्कार और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है।

    यह एपिसोड विशेष रूप से उन श्रोताओं के लिए उपयोगी है जो:

    गीता के ज्ञान-विज्ञान योग को समझना चाहते हैं

    कर्म करते हुए भी मानसिक शांति बनाए रखना चाहते हैं

    निष्काम कर्म और अनासक्ति का अभ्यास सीखना चाहते हैं

    आत्मज्ञान और आध्यात्मिक विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं

    कृष्णवाणी के साथ यह श्रवण-यात्रा आपको सिखाएगी कि

    ज्ञान और कर्म का संतुलन ही

    जीवन की पूर्णता और मोक्ष का मार्ग है।

    Show More Show Less
    24 mins
adbl_web_anon_alc_button_suppression_c
No reviews yet