गीता सार – अध्याय 05 cover art

गीता सार – अध्याय 05

गीता सार – अध्याय 05

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कर्मसंन्यासयोग श्री कृष्ण कहते हैं कि सन्यास का मतलब है सांसारिक वस्तुओं से विरक्त होकर ईश्वर की उपासना करना। लेकिन सन्यास लेने के लिए हर किसी को वन – गमन की जरुरत नहीं है। अपना कर्म करते हुए यदि भौतिक सुखों से मोह – भंग कर लिया जाये तो भी मनुष्य ईश्वर को प्राप्त कर सकता है। कृपया गीता के अध्ययन को बार बार सुने. प्रस्तुत है अध्याय - 05 धन्यवाद
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