Emergency Ki Inside Story kapak görseli

Emergency Ki Inside Story

Önizleme

Standard'ı 30 gün ücretsiz edinin

Deneme süresinden sonra aylık 5,99£. Aylık olarak iptal edilir.
0,00£ karşılığında başlayın
Diğer seçenekler

Emergency Ki Inside Story

Yazan: Kuldeep Nayar, Not available - translator
Seslendiren: Ravi Rajesh
0,00£ karşılığında başlayın

30 gün sonra aylık 5,99£. Dilediğiniz zaman iptal edebilirsiniz.

14,18£ karşılığında satın al

14,18£ karşılığında satın al

This Season's Biggest Deal | £0.99/mo for 3 months + £10 Audible bonus

£5.99/mo after 3 months - terms apply. Cancel monthly
‘इन सबकी शुरुआत उड़ीसा में 1972 में हुए उप-चुनाव से हुई। लाखों रुपए खर्च कर नंदिनी को राज्य की विधानसभा के लिए चुना गया था। गांधीवादी जयप्रकाश नारायण ने भ्रष्टाचार के इस मुद्दे को प्रधानमंत्री के सामने उठाया। उन्होंने बचाव में कहा कि कांग्रेस के पास इतने भी पैसे नहीं कि वह पार्टी दफ्तर चला सके। जब उन्हें सही जवाब नहीं मिला, तब वे इस मुद्दे को देश के बीच ले गए। एक के बाद दूसरी घटना होती चली गई और जे.पी. ने ऐलान किया कि अब जंग जनता और सरकार के बीच है। जनता—जो सरकार से जवाबदेही चाहती थी और सरकार—जो बेदाग निकलने की इच्छुक नहीं थी।’ ख्यातिप्राप्त लेखक कुलदीप नैयर इमरजेंसी के पीछे की सच्ची कहानी बता रहे हैं। क्यों घोषित हुई इमरजेंसी और इसका मतलब क्या था, यह आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि तब प्रेरणा की शक्ति भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मिली थी और आज भी सबकी जबान पर भ्रष्टाचार का ही मुद्दा है। एक नई प्रस्तावना के साथ लेखक वर्तमान पाठकों को एक बार फिर तथ्य, मिथ्या और सत्य के साथ आसानी से समझ आनेवाली विश्लेषणात्मक शैली में परिचित करा रहे हैं। वह अनकही यातनाओं और मुख्य अधिकारियों के साथ ही उनके काम करने के तरीके से परदा उठाते हैं। भारत के लोकतंत्र में 19 महीने छाई रही अमावस पर रहस्योद्घाटन करनेवाली एक ऐसी पुस्तक, जिसे अवश्य सुना जाना चाहिए|. Elections & Political Process Freedom & Security Politics & Government United States World
adbl_web_anon_alc_button_suppression_t1
Henüz yorum yok