Regular price: £6.59

Membership details Membership details
  • A 30-day trial plus your first audiobook, free
  • 1 credit/month after trial – choose any book, any price
  • Easy exchanges – swap any book you don’t love
  • Keep your audiobooks, even if you cancel
  • Free, unlimited access to Audio Shows
  • After your trial, Audible is just £7.99/month
OR
In Basket

Summary

भारत की आज़ादी के बाद में दूसरा सबसे बड़ा प्रवास। 2013 के मुज़फ़्फ़रनगर के अमानविये दंगो की कहानी, जिसमें जब सारे लोग शहर को छोड़ने के लिए बेताब हो रहें हैं । एक रेटायअर्ड अध्यापक रुकने का दृढ़ निश्चय कर लेते हैं।

जैसे उम्र के साथ में मास्टर जी अकेले होते जा रहे हैं, बाहर के लोगों से उनकी बातचीत भी काम होती जा रही है, ऐसे समय पर उन्हें देव मिलता है। देव के लिए मास्टर जी एक प्रतिमा से काम नहीं हैं, और मास्टर जी के लिए देव के घर के सदस्य की तरह।

मास्टर जी ने ही देव को बहुत कुछ सिखाया है। उनके पसमे ज़िंदगी से जुड़े हुए हर सवाल के जवाब हुआ करते थे, जिन जवाबों से उन्होंने देव को एक अलग ज़िंदगी दी है। आज दंगो में ज़िंदगी के सावलो से घिरे हुए हैं। मास्टर जी और देव जो की 2013 के मुज़फ़्फ़रनगर के डरावने दंगो को अपनी आँखों से देखतें हैं। जिसमें देव मास्टर जी को, जिन्हें की अपने बचपन से जुड़ी यादों का जुनून सवार है, उसी शहर को छोड़ने की सलाह देता है जहाँ उनका बचपन बीता था।

सीख, ज़िंदगी, दोस्ती, बचपन , दंगे, बलात्कार और सियासत की एक दर्दनाक कहानी ।

Please note: This audiobook is in Hindi.

©2017 Neeraj Agnihotri (P)2017 Neeraj Agnihotri

What members say

Average customer ratings

Overall

  • 5 out of 5 stars
  • 5 Stars
    1
  • 4 Stars
    0
  • 3 Stars
    0
  • 2 Stars
    0
  • 1 Stars
    0

Performance

  • 5 out of 5 stars
  • 5 Stars
    1
  • 4 Stars
    0
  • 3 Stars
    0
  • 2 Stars
    0
  • 1 Stars
    0

Story

  • 4 out of 5 stars
  • 5 Stars
    0
  • 4 Stars
    1
  • 3 Stars
    0
  • 2 Stars
    0
  • 1 Stars
    0
Sort by:
  • Overall
    5 out of 5 stars
  • Performance
    5 out of 5 stars
  • Story
    4 out of 5 stars

This Book for all persons who love humanity.

This is my first audiobook. Best part of the audiobook is "Master ji" and his thought. Middle part of the audiobook is cunfusing and but overall good book. *****